राजीव सिंह

राजीव सिंह, झारखंड

होडोपैथी के संरक्षक • पर्यावरण नेतृत्वकर्ता • कृषि-उद्यमी • अनुसंधान एवं ज्ञान-संरक्षण समर्थक

झारखंड की मिट्टी से ज्ञान, प्रकृति और किसानों के व्यापक भविष्य तक

राजीव सिंह झारखंड के पर्यावरणविद्, कृषि-उद्यमी और सतत विकास के समर्थक हैं। उनका कार्य कृषि, पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता को एक साझा उद्देश्य से जोड़ता है।

गिरिडीह से अपनी गतिविधियों का संचालन करते हुए उन्होंने इस मूल विश्वास के आधार पर अनेक पहल विकसित की हैं कि स्थायी प्रगति की शुरुआत स्वस्थ मिट्टी, जीवंत जंगलों, वैज्ञानिक ज्ञान और सशक्त समुदायों से होनी चाहिए।

Sansar Green Mission Pvt. Ltd., Harit Sansar, Erwon Energy Pvt. Ltd. और Sansar Institute of Agricultural Research & Training—SIART के माध्यम से राजीव सिंह जमीनी चुनौतियों और आधुनिक संस्थानों के बीच व्यावहारिक सेतु बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

उनके व्यावसायिक और सामाजिक कार्यों का दायरा पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कृषि, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास तक विस्तृत है। राजीव सिंह की आधिकारिक प्रोफाइल उनके व्यापक पर्यावरणीय, सामाजिक और उद्यमशील दृष्टिकोण को प्रस्तुत करती है।

होडोपैथी ज्ञान-संरक्षण पहल में वे संरक्षक एवं संरक्षण समर्थक की भूमिका निभाते हैं। इस भूमिका के अंतर्गत वे झारखंड के आदिवासी समुदायों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान के जिम्मेदार प्रलेखन, सम्मानपूर्ण पहचान, वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

इस भूमिका का अर्थ यह नहीं है कि राजीव सिंह ने होडोपैथी की स्थापना की है अथवा वे इसके स्वामी हैं। होडोपैथी का मूल ज्ञान उन समुदायों, बुजुर्गों और पारंपरिक ज्ञानधारकों की सामूहिक विरासत है, जिन्होंने इसे पीढ़ियों से संरक्षित किया है।

राजीव सिंह की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया को जोड़ने की है:

सामुदायिक ज्ञान → जिम्मेदार प्रलेखन → शिक्षा → अनुसंधान → संरक्षण


झारखंड की जड़ों से जुड़ी यात्रा

राजीव सिंह की व्यावसायिक यात्रा उद्यमिता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और कृषि के संगम पर विकसित हुई है।

उनका दृष्टिकोण व्यावहारिक है—ज्ञान केवल सम्मेलनों, रिपोर्टों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसे किसानों, खेतों, प्राकृतिक संसाधनों और ग्रामीण समुदायों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने में योगदान देना चाहिए।

यही विचार Sansar Green की “मिट्टी से मंडी तक—Soil to Market” परिकल्पना में दिखाई देता है। यह मॉडल मृदा परीक्षण, कृषि उत्पादों, वैज्ञानिक परामर्श, आधुनिक प्रौद्योगिकी, फसल उत्पादन, मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुँच को किसान-केंद्रित व्यवस्था में जोड़ने का प्रयास करता है।

राजीव सिंह खेती को कृषि-यात्रा का अंतिम चरण नहीं मानते। उनका विश्वास है कि मिट्टी को समझने से लेकर किसान को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने तक पूरी व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। Sansar Green अपने मिशन में कृषि विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सतत विकास और किसान सशक्तीकरण के समन्वय पर बल देता है।

“कृषि केवल फसल उगाने का कार्य नहीं है। यह मिट्टी की रक्षा करने, ज्ञान का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने और किसान की यात्रा को सम्मान, उचित मूल्य तथा समृद्धि तक पहुँचाने का संकल्प है।”

राजीव सिंह


राजीव सिंह होडोपैथी के संरक्षक क्यों बने?

होडोपैथी राजीव सिंह के पर्यावरणीय और कृषि मिशन का एक महत्त्वपूर्ण एवं पूरक आयाम है।

होडोपैथी झारखंड के जंगलों, स्थानीय एवं औषधीय वनस्पतियों, सामुदायिक परंपराओं और प्रकृति-आधारित कल्याण से जुड़ी स्वदेशी नृवंश-वनस्पति ज्ञान-परंपरा को अभिव्यक्त करती है। इस ज्ञान का बड़ा भाग औपचारिक लिखित अभिलेखों की अपेक्षा मौखिक शिक्षा, अनुभव और सामुदायिक व्यवहार के माध्यम से जीवित रहा है।

पलायन, बदलती जीवन-शैली, प्राकृतिक आवासों का क्षरण और अनुभवी ज्ञानधारकों की बढ़ती आयु इस ज्ञान-हस्तांतरण की परंपरा को कमजोर कर रही है। जब कोई अनुभवी बुजुर्ग अपना ज्ञान अगली पीढ़ी को सौंपे बिना चला जाता है, तो उसके साथ पीढ़ियों से संचित अनेक अनुभव और अवलोकन भी समाप्त हो सकते हैं।

इसी कारण राजीव सिंह की होडोपैथी परिकल्पना का आधार स्वामित्व नहीं, बल्कि संरक्षण है।

होडोपैथी मिशन के प्रमुख उद्देश्य

  • समुदाय की पूर्व-सूचित भागीदारी से मौखिक इतिहास का अभिलेखीकरण
  • पौधों के पारंपरिक नामों और स्थानीय शब्दावली का संरक्षण
  • वनस्पतियों, प्राकृतिक आवासों और ऋतु-संबंधी अवलोकनों का प्रलेखन
  • लिखित, छायाचित्रात्मक और डिजिटल अभिलेखों का निर्माण
  • पौधों के स्थानीय नामों को प्रमाणित वानस्पतिक पहचान से जोड़ना
  • जिम्मेदार नृवंश-वनस्पति और वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना
  • समुदायों को उचित श्रेय देना और गोपनीय ज्ञान की सुरक्षा करना
  • औषधीय वनस्पतियों और उनके प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण
  • पारंपरिक ज्ञानधारकों को शोधकर्ताओं और संस्थानों से जोड़ना
  • भावी पीढ़ियों के लिए विश्वसनीय शैक्षणिक संसाधन विकसित करना

“होडोपैथी की शुरुआत किसी एक व्यक्ति से नहीं हुई। यह पीढ़ियों के अवलोकन, सामुदायिक अनुभव और झारखंड के जंगलों के साथ गहरे संबंध से विकसित हुई है। हमारा दायित्व इस विरासत को पूरे सम्मान के साथ संरक्षित करना है।”

राजीव सिंह


पारंपरिक ज्ञान और विज्ञान के बीच सेतु

राजीव सिंह के कार्यों की एक प्रमुख विशेषता व्यावहारिक ज्ञान को वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक संस्थानों से जोड़ने का उनका प्रयास है।

होडोपैथी के लिए यह दृष्टिकोण विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि पारंपरिक ज्ञान का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन उसे पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन के बिना प्रमाणित चिकित्सा के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

जिम्मेदार अनुसंधान प्रक्रिया इस प्रकार होनी चाहिए:

पारंपरिक अवलोकन → नैतिक प्रलेखन → वानस्पतिक पहचान → सुरक्षा मूल्यांकन → वैज्ञानिक अनुसंधान → प्रमाण

किसी पारंपरिक ज्ञानधारक द्वारा बताए गए उपयोग को प्रारंभिक चरण में पारंपरिक अनुभव या अवलोकन के रूप में ही दर्ज किया जाना चाहिए। उसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तभी माना जा सकता है, जब संबंधित पौधे की वानस्पतिक पहचान, प्रयोगशाला परीक्षण, सुरक्षा मूल्यांकन और अन्य आवश्यक वैज्ञानिक अध्ययन पूरे हो जाएँ।

यह स्पष्ट अंतर पारंपरिक ज्ञानधारकों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के हितों की रक्षा करता है तथा होडोपैथी को विश्वसनीय शैक्षणिक अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने का मजबूत आधार देता है।


IIT (ISM) धनबाद: झारखंड के नवाचार को प्रौद्योगिकी से जोड़ना

IIT (ISM) धनबाद के साथ राजीव सिंह का जुड़ाव उनकी कृषि-नवाचार यात्रा की प्रमुख संस्थागत उपलब्धियों में से एक है।

अगस्त 2025 में CIIE, IIT (ISM) Dhanbad Foundation और Sansar Green ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जैविक खेती समाधान विकसित करने के लिए सहयोग की घोषणा की। प्रस्तावित कार्यों में AI-आधारित मृदा स्वास्थ्य विश्लेषण, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसल संबंधी सुझाव, किसानों के लिए डिजिटल प्रशिक्षण, विशेषज्ञ सहायता और क्षेत्र-विशिष्ट कृषि समाधान सम्मिलित थे।

आधिकारिक घोषणा में स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित नवाचार के प्रति राजीव सिंह की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया गया है और Sansar Green को प्राप्त संस्थागत इन्क्यूबेशन सहयोग की पुष्टि की गई है। IIT (ISM) धनबाद की प्रेस विज्ञप्ति पढ़ें

वर्ष 2026 में भी राजीव सिंह ने IIT (ISM) धनबाद में किसान-केंद्रित मृदा परीक्षण, सॉइल इंटेलिजेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कृषि नवाचार से संबंधित संवादों में भाग लिया। ये गतिविधियाँ दर्शाती हैं कि गिरिडीह से विकसित किसी विचार को इंजीनियरिंग विशेषज्ञता, इन्क्यूबेशन सहायता और राष्ट्रीय अनुसंधान मंचों से किस प्रकार जोड़ा जा सकता है।

यही सहयोगी दृष्टिकोण उनके होडोपैथी मिशन का भी आधार है—सामुदायिक अनुभवों का सम्मानपूर्वक प्रलेखन हो और उसके बाद उन्हें उपयुक्त वानस्पतिक एवं वैज्ञानिक अध्ययन से जोड़ा जाए।


कृषि विश्वविद्यालयों और इन्क्यूबेटरों के साथ सहभागिता

राजीव सिंह और Sansar Green ने विभिन्न कृषि एवं नवाचार संस्थानों के साथ इन्क्यूबेशन, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, वैज्ञानिक परामर्श और ज्ञान-साझाकरण के अवसरों पर कार्य किया है।

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विवरणों में निम्न संस्थागत सहभागिताएँ सम्मिलित हैं:

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर

Sansar Green ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के साथ कृषि-व्यवसाय इन्क्यूबेशन, प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण संबंधी गतिविधियों में भाग लिया है। सार्वजनिक संगठनात्मक संचारों में जैविक कृषि उत्पादों, प्राकृतिक खेती, किसान प्रशिक्षण और कृषि अनुसंधान को खेतों तक पहुँचाने से संबंधित चर्चाओं का उल्लेख किया गया है।

इस संबंध को नवीनतम औपचारिक दस्तावेजों के अनुसार ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। पूर्ण प्रशिक्षण, इन्क्यूबेशन में भागीदारी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर चर्चा और निरंतर संस्थागत साझेदारी—ये अलग-अलग उपलब्धियाँ हैं और इनका उल्लेख उनकी वास्तविक स्थिति के अनुसार होना चाहिए।

IIT रोपड़ टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेटर फाउंडेशन

Sansar Green ने IIT रोपड़ के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से इन्क्यूबेशन, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रयोगशाला सुविधाओं, प्रोटोटाइप विकास और वित्तीय सहयोग की संभावनाओं पर कार्य किया है।

इस प्रकार की सहभागिता मृदा विश्लेषण, कृषि प्रौद्योगिकी और अनुसंधान-आधारित उत्पाद विकास को अधिक मजबूत बना सकती है।

केरल कृषि विश्वविद्यालय

Sansar Green की सार्वजनिक सामग्रियों में सूक्ष्मजीवी प्रौद्योगिकियों, जैव उर्वरकों और कृषि अनुसंधान से संबंधित सहभागिता का उल्लेख है। किसी विशिष्ट प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को संबंधित अनुबंध अथवा आधिकारिक संचार में दर्ज वास्तविक कार्यक्षेत्र और वर्तमान स्थिति के अनुसार ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

असम कृषि विश्वविद्यालय

असम कृषि विश्वविद्यालय के साथ सहभागिता जैविक कृषि उत्पादों, टिकाऊ कृषि, अनुसंधान, प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी संबंधी अवसरों की संभावनाएँ तलाशने पर केंद्रित रही है।

ये संबंध संस्थागत ज्ञान और वैज्ञानिक सीख के प्रति राजीव सिंह की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। हालाँकि, प्रत्येक सहभागिता को सामान्य रूप से “MoU” नहीं कहा जाना चाहिए। इन्क्यूबेशन, प्रशिक्षण, परामर्श, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण संबंधी पूछताछ और औपचारिक सहयोग अलग-अलग उपलब्धियाँ हैं तथा इनका उल्लेख सटीक रूप से किया जाना आवश्यक है।


शिक्षा: नेतृत्व की मजबूत नींव

सार्वजनिक संगठनात्मक प्रोफाइलों में राजीव सिंह को IIM Ranchi और Mumbai University का पूर्व छात्र बताया गया है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि प्रबंधन, उद्यमिता, कानून और संस्थागत समझ को एक साथ जोड़ती है।

यह बहुविषयक आधार होडोपैथी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए केवल औषधीय वनस्पतियों की जानकारी पर्याप्त नहीं है। इसके लिए निम्न क्षमताएँ भी आवश्यक हैं:

  • समुदायों के साथ विश्वासपूर्ण संबंध विकसित करना
  • पारंपरिक ज्ञान और जैव-विविधता संबंधी अधिकारों को समझना
  • संस्थानों और सहयोगी नेटवर्क का निर्माण करना
  • लिखित एवं डिजिटल अभिलेखों को व्यवस्थित करना
  • शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के साथ संवाद स्थापित करना
  • संरक्षण कार्यक्रमों का प्रबंधन करना
  • ज्ञान का जिम्मेदार संचार करना
  • क्षेत्रीय पहल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों से जोड़ना

राजीव सिंह के लिए शिक्षा केवल औपचारिक योग्यता प्राप्त करने तक सीमित नहीं है। यह संस्थानों, किसानों, वैज्ञानिकों, सामुदायिक बुजुर्गों और प्राकृतिक पर्यावरण से निरंतर सीखने की प्रक्रिया है।


SIART: अनुसंधान और शिक्षा का संस्थागत मंच

राजीव सिंह ने Sansar Institute of Agricultural Research & Training—SIART की स्थापना अनुसंधान, शिक्षा, नवाचार, प्रशिक्षण और क्षमता-विकास के मंच के रूप में की है।

SIART के प्रमुख रुचि-क्षेत्र हैं:

  • जैविक एवं प्राकृतिक कृषि
  • मृदा स्वास्थ्य और सूक्ष्मजीव विज्ञान
  • जैव उर्वरक और जैविक कृषि उत्पाद
  • जलवायु-अनुकूल कृषि
  • टिकाऊ फसल प्रबंधन
  • किसान प्रशिक्षण
  • ग्रामीण उद्यमिता
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
  • विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं की सहभागिता

SIART का संस्थागत अनुभव भविष्य में होडोपैथी के शैक्षणिक और अनुसंधान पक्ष में योगदान कर सकता है। यह निम्न समूहों को एक साझा मंच पर जोड़ सकता है:

ज्ञानधारक + विद्यार्थी + वनस्पति वैज्ञानिक + नृवंश-वनस्पति विशेषज्ञ + कृषि वैज्ञानिक + मानवविज्ञानी + संरक्षण विशेषज्ञ

इसका उद्देश्य होडोपैथी को किसी निजी संस्था के अधीन करना नहीं है। लक्ष्य एक ऐसा सुव्यवस्थित मंच उपलब्ध कराना है, जिसके माध्यम से समुदाय द्वारा अनुमोदित ज्ञान का प्रलेखन, अध्ययन और संरक्षण किया जा सके।


हरित संसार और जीवंत ज्ञान-संग्रह

होडोपैथी का संरक्षण केवल पुस्तकों, छायाचित्रों और डिजिटल डेटाबेस के माध्यम से नहीं किया जा सकता। यह ज्ञान जीवित वनस्पतियों, प्राकृतिक आवासों और सक्रिय पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ा हुआ है।

Harit Sansar के माध्यम से राजीव सिंह वृक्षारोपण, जैव-विविधता संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करते हैं। इसकी व्यापक परिकल्पना केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है; यह उपयुक्त प्रजाति के चयन, नियमित देखभाल और दीर्घकालीन सामुदायिक जिम्मेदारी पर भी बल देती है।

होडोपैथी के संदर्भ में यह पहल निम्न गतिविधियों को सहयोग दे सकती है:

  • सामुदायिक औषधीय वनस्पति उद्यान
  • स्थानीय प्रजातियों की पौधशालाएँ
  • नृवंश-वनस्पति प्रदर्शन क्षेत्र
  • बीज और रोपण सामग्री का संरक्षण
  • क्षतिग्रस्त प्राकृतिक आवासों का पुनर्स्थापन
  • शैक्षणिक पौधरोपण क्षेत्र
  • छायाचित्रात्मक और वानस्पतिक निगरानी

इस संरक्षण मॉडल को इस प्रकार समझा जा सकता है:

मौखिक ज्ञान + लिखित अभिलेख + डिजिटल ज्ञानकोष + जीवित वनस्पतियाँ = जीवंत विरासत

किसी पौधे का प्रलेखन केवल शुरुआत है। उस पौधे, उसके प्राकृतिक आवास, स्थानीय नाम और उससे जुड़े सामुदायिक ज्ञान—सभी का जीवित रहना आवश्यक है।


शिक्षक और सार्वजनिक ज्ञान के समर्थक

राजीव सिंह का कार्य केवल उद्यमों और संस्थागत बैठकों तक सीमित नहीं है। उनकी सार्वजनिक प्रोफाइल में किसान शिक्षा, विश्वविद्यालयी कार्यक्रमों, सम्मेलनों, डिजिटल मंचों और आकाशवाणी तथा दूरदर्शन के कृषि संवादों में सहभागिता का भी उल्लेख है।

Sansar Green और उससे जुड़े डिजिटल चैनलों के माध्यम से कृषि एवं पर्यावरण संबंधी जानकारी किसानों, विद्यार्थियों, बागवानी प्रेमियों और ग्रामीण उद्यमियों के व्यापक समुदाय तक पहुँची है।

शिक्षा को प्राथमिकता देने वाला यही दृष्टिकोण होडोपैथी के भविष्य के लिए महत्त्वपूर्ण है। एक जिम्मेदार ज्ञान मंच निम्न क्षेत्रों में सहयोग कर सकता है:

सामुदायिक शिक्षा

अनुभवी ज्ञानधारकों और समुदाय की युवा पीढ़ी के बीच ज्ञान का पारस्परिक एवं पीढ़ीगत हस्तांतरण।

विद्यालयी शिक्षा

झारखंड के जंगलों, जैव-विविधता, सांस्कृतिक रूप से महत्त्वपूर्ण वनस्पतियों और आदिवासी विरासत के विषय में जागरूकता।

विश्वविद्यालयी अनुसंधान

नृवंश-वनस्पति विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, मानवविज्ञान, वानिकी, कृषि, जैव-विविधता और प्राकृतिक उत्पाद विज्ञान से संबंधित अध्ययन।

डिजिटल संरक्षण

समुदाय की सहमति से पौध पुस्तकालय, छायाचित्र, मौखिक इतिहास, साक्षात्कार और शैक्षणिक फिल्में तैयार करना।

कुछ जानकारियाँ सार्वजनिक शिक्षा के लिए उपयुक्त हो सकती हैं। परंतु पवित्र, गोपनीय अथवा व्यावसायिक रूप से संवेदनशील ज्ञान तक पहुँच प्रतिबंधित या समुदाय के नियंत्रण में रखी जा सकती है।


सामुदायिक अधिकारों की सुरक्षा

राजीव सिंह की होडोपैथी परिकल्पना यह स्वीकार करती है कि प्रलेखन कभी भी समुदायों से ज्ञान छीनने की प्रक्रिया नहीं बनना चाहिए।

जिम्मेदार ज्ञान-संरक्षण निम्न सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए:

  • समुदाय की पूर्व-सूचित भागीदारी
  • स्पष्ट सामुदायिक सहमति
  • मूल ज्ञानधारकों को उचित श्रेय
  • गोपनीय और पवित्र ज्ञान का सम्मान
  • अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग से सुरक्षा
  • आवश्यकता के अनुसार समुदाय-नियंत्रित पहुँच
  • उचित मान्यता और न्यायसंगत लाभ-साझाकरण

आदिवासी ज्ञानधारकों को केवल जानकारी प्रदान करने वाले स्रोत के रूप में नहीं, बल्कि सक्रिय और समान भागीदार के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।

संरक्षक के रूप में राजीव सिंह की भूमिका का मूल सिद्धांत यही है—होडोपैथी के वास्तविक ज्ञान-संरक्षकों को सहयोग देना, उनका स्थान लेना नहीं।


झारखंड से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान तक

राजीव सिंह की दीर्घकालीन परिकल्पना होडोपैथी को झारखंड की स्वदेशी ज्ञान-विरासत के एक जिम्मेदारीपूर्वक प्रलेखित भाग के रूप में पहचान दिलाने की है।

भविष्य में इस पहल के अंतर्गत निम्न कार्य किए जा सकते हैं:

  • होडोपैथी का लिखित और डिजिटल ज्ञानकोष
  • सहमति-आधारित पारंपरिक ज्ञानधारक नेटवर्क
  • वानस्पतिक और नृवंश-वनस्पति प्रलेखन
  • सामुदायिक औषधीय वनस्पति उद्यान
  • विश्वविद्यालयों के साथ अनुसंधान साझेदारी
  • अंग्रेजी, हिंदी और स्थानीय भाषाओं में प्रकाशन
  • विद्यार्थियों और समुदायों के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम
  • चयनित एवं प्रलेखित पौधों का वैज्ञानिक अध्ययन
  • सामुदायिक श्रेय और लाभ-साझाकरण की व्यवस्था
  • राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ज्ञान-विनिमय

इसका उद्देश्य होडोपैथी को झारखंड से अलग करना नहीं है। लक्ष्य इसे व्यापक पहचान दिलाते हुए इसकी पहचान को उन समुदायों, भाषाओं, जंगलों और वनस्पतियों से दृढ़तापूर्वक जोड़े रखना है, जिनके बीच यह ज्ञान विकसित हुआ।


उद्यमिता से आगे बढ़ती विरासत

राजीव सिंह की यात्रा उद्यमिता की एक विस्तृत और उत्तरदायी परिभाषा प्रस्तुत करती है।

Sansar Green के माध्यम से वे कृषि को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और बाजार से जोड़ते हैं।

Harit Sansar के माध्यम से वे लोगों को वृक्षारोपण, जैव-विविधता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ते हैं।

SIART के माध्यम से वे अनुसंधान को प्रशिक्षण, नवाचार और ग्रामीण क्षमता-विकास से जोड़ते हैं।

संस्थागत सहभागिताओं के माध्यम से वे झारखंड की जमीनी चुनौतियों को विश्वविद्यालयों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों से जोड़ते हैं।

होडोपैथी के संरक्षक के रूप में वे स्वदेशी विरासत को नैतिक प्रलेखन, जिम्मेदार अनुसंधान और जीवंत प्रकृति-संरक्षण से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

उनके व्यापक मिशन को पाँच विचारों में व्यक्त किया जा सकता है:

स्वस्थ मिट्टी। जीवंत जंगल। सशक्त किसान। जिम्मेदार अनुसंधान। संरक्षित ज्ञान।

राजीव सिंह—होडोपैथी के संरक्षक

पर्यावरण नेतृत्वकर्ता | कृषि-उद्यमी | सतत विकास समर्थक | अनुसंधान एवं शिक्षा प्रवर्तक

संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक: Sansar Green Mission Pvt. Ltd.
संस्थापक: Harit Sansar
संस्थापक: Sansar Institute of Agricultural Research & Training—SIART
संस्थापक: Erwon Energy Pvt. Ltd.
संरक्षक: Hodopathy Knowledge Preservation Initiative

“भविष्य हमसे पारंपरिक जीवन-बुद्धि और आधुनिक विज्ञान में से किसी एक को चुनने की अपेक्षा नहीं करता। भविष्य की आवश्यकता दोनों को जिम्मेदारीपूर्वक जोड़ना है—वैज्ञानिक प्रमाणों का सम्मान करते हुए, प्रकृति की रक्षा करते हुए और उस समुदाय को उचित पहचान देते हुए जहाँ से यह ज्ञान उत्पन्न हुआ है।”

राजीव सिंह

झारखंड की मिट्टी से भारत के खेतों तक।
जंगलों से ज्ञान तक।
ज्ञान से अनुसंधान तक।
और अनुसंधान से एक टिकाऊ भविष्य तक।

राजीव सिंह का उद्देश्य केवल संस्थाओं का निर्माण करना नहीं है। उनका मिशन ऐसे सेतु बनाना है जो प्रकृति को लोगों से, विज्ञान को परंपरा से, विश्वविद्यालयों को समुदायों से और अतीत के ज्ञान को भविष्य की संभावनाओं से जोड़ सकें।