दैनिक जागरण | धनबाद संस्करण | 9 अक्टूबर 2026
आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण के लिए पर्यावरणविद् राजीव सिंह की पहल को दैनिक जागरण ने अपने 9 अक्टूबर 2026 के अंक में स्थान दिया। समाचार में गिरिडीह में होड़ोपैथी से जुड़ी तीन वेबसाइटों के लोकार्पण और पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण की योजना को विस्तार से प्रकाशित किया गया।
राजीव सिंह के गिरिडीह स्थित आवासीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में Hodopathy.in, Hodopathy.org और Hodopathy.com का शुभारंभ हुआ। इन डिजिटल मंचों के माध्यम से आदिवासी बुजुर्गों, पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय जानकारों के अनुभवों को संकलित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। गांडेय स्थित होड़ोपैथी पार्क को भी इस अभियान से जोड़ा गया है।
बुजुर्गों के अनुभवों का होगा दस्तावेजीकरण
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, आदिवासी समुदायों के पास जंगलों, औषधीय पौधों और उनके पारंपरिक उपयोगों का पीढ़ियों पुराना ज्ञान है। इसका बड़ा हिस्सा मौखिक परंपरा में सुरक्षित है। अभियान की टीम अनुभवी वैद्यों और स्थानीय जानकारों के साक्षात्कार के माध्यम से उनके अनुभवों तथा वनस्पतियों से जुड़ी जानकारी का दस्तावेज तैयार कर रही है। संकलित जानकारी की तथ्य-जांच और उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य से मिलान भी किया जा रहा है।
डिजिटल संग्रह से पुस्तक और प्रशिक्षण तक
अभियान को तीन चरणों में आगे बढ़ाने की योजना है। पहले चरण में पारंपरिक ज्ञान का डिजिटल संकलन किया जाएगा। दूसरे चरण में वरिष्ठ वैद्यों के अनुभवों और औषधीय वनस्पतियों पर पुस्तक प्रकाशित की जाएगी। तीसरे चरण में युवाओं को वनस्पति पहचान, संरक्षण और दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण देने की योजना है।
इसके साथ शोध संस्थानों के सहयोग से पारंपरिक उपयोगों की प्रभावशीलता और सुरक्षा पर वैज्ञानिक अध्ययन का प्रयास भी होगा।
औषधीय पौधों और जंगलों को बचाने पर जोर
समाचार में राजीव सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि होड़ोपैथी के ज्ञान को सहेजने के साथ उन पौधों और जंगलों का संरक्षण भी आवश्यक है, जिनसे यह परंपरा जुड़ी है। स्थानीय औषधीय प्रजातियों के पौधरोपण और संवर्धन से वन संरक्षण तथा जैव विविधता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने पारंपरिक वैद्यों, बुजुर्गों, वनस्पति जानकारों और ग्रामीण समुदायों से अपने अनुभव साझा करने की अपील की। युवाओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और सामाजिक संस्थाओं को भी अभियान में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया है। दस्तावेजीकरण में ज्ञानधारकों की सहमति, अधिकारों और योगदान के सम्मान को प्राथमिकता दी जाएगी।
कार्यक्रम में सीए राकेश, रिमी सिंह, समन, शुभम, सोनाली, आंचल सिंह, आनंद मुर्मू, विनीता टुडू और मनोज हेंब्रम सहित पारंपरिक वैद्य एवं आदिवासी समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
इस पहल को स्थान देने के लिए दैनिक जागरण का आभार। यह समाचार आदिवासी ज्ञान-विरासत और औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग है।
साभार: दैनिक जागरण, धनबाद संस्करण, 9 अक्टूबर 2026।
