द टाइम्स ऑफ इंडिया में होड़ोपैथी संरक्षण की पहल को स्थान

The Times of India Ranchi edition clipping dated 9 October 2026 covering Rajeev Singh’s Hodopathy conservation initiative and the launch of three websites.

द टाइम्स ऑफ इंडिया, रांची संस्करण | 9 अक्टूबर 2026 द टाइम्स ऑफ इंडिया के रांची संस्करण में आज, 9 अक्टूबर 2026 को, राजीव सिंह की होड़ोपैथी से जुड़ी पहल और तीन वेबसाइटों के शुभारंभ का समाचार प्रकाशित हुआ। यह Read More …

आदिवासी ज्ञान-विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल, होड़ोपैथी की तीन वेबसाइटों का लोकार्पण

गिरिडीह में Hodopathy.in के शुभारंभ पर लैपटॉप के पास आदिवासी बुजुर्गों और अन्य प्रतिभागियों के साथ राजीव सिंह व रिमी सिंह।

राजीव सिंह की पहल पर पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, औषधीय पौधों और जंगलों के संरक्षण को मिला डिजिटल विस्तार गिरिडीह, 8 अक्टूबर 2026। आदिवासी समुदायों के सदियों पुराने ज्ञान को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से Read More …

होडोपैथी और आयुर्वेद: अंतर, समानताएँ और प्रकृति के प्रति साझा सम्मान

Hindi infographic by Rajeev Singh comparing Hodopathy and Ayurveda, featuring Jharkhand Adivasi forest knowledge, medicinal plants, oral traditions and shared values.

लेखक: राजीव सिंह भारत का ज्ञान-संसार अत्यंत विविध और समृद्ध है। स्वास्थ्य, भोजन, खेती, वन, औषधीय पौधों, जीवनशैली और सामुदायिक कल्याण से जुड़ी परंपराएँ किसी एक समाज या स्रोत से नहीं आई हैं। इन्हें शास्त्रीय ज्ञान-परंपराओं, आदिवासी समुदायों, स्थानीय लोक-अनुभवों Read More …

होडोपैथी: झारखंड की पारंपरिक वनस्पति विरासत और आधुनिक विज्ञान के बीच जिम्मेदार सेतु

लेखक: राजीव सिंह, झारखंड तेजी से बदलती जीवनशैली, अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन और कृत्रिम रसायनों पर बढ़ती निर्भरता के बीच दुनिया एक बार फिर प्रकृति-सम्मत, संतुलित और टिकाऊ जीवन-पद्धतियों की ओर देख रही है। ऐसे समय में झारखंड के वनों, समृद्ध Read More …

होडोपैथी: झारखंड के आदिवासी पारंपरिक आरोग्य ज्ञान को वैज्ञानिक और टिकाऊ भविष्य देने की पहल

राजीव सिंह झारखंड के जंगल में आदिवासी ज्ञानधारकों के साथ होडोपैथी, स्थानीय औषधीय पौधों और पारंपरिक वनस्पति ज्ञान पर संवाद करते हुए।

🌿 होडोपैथी: झारखंड के आदिवासी पारंपरिक आरोग्य ज्ञान को वैज्ञानिक और टिकाऊ भविष्य देने की पहल झारखंड के जंगल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि सदियों से संचित पारंपरिक ज्ञान के जीवंत भंडार हैं। यहां के आदिवासी समुदाय पीढ़ियों से स्थानीय Read More …